बुधवार, 23 अगस्त 2023

बाबा सुणकर थांरो नाम (भजन)

तर्ज - मीठे रस सूं भरियोडी राधा राणी लागे


बाबा सुणकर थांरो नाम दौड्या आया थारे धाम,

दौड्या आया थारे धाम बाबा, नैया ने पार लगा दीजो


दिन काटां गिण गिण कर म्हारी बिगडी बणावो - 2

बेगा सा लीले चढ़ आवो, म्हाने मत तरसावो -2

अब तो बिगडी जावे बात, बाबा थारो ही है साथ

बाबा नैया ने पार लगा दीजो.....


दर पर थारे जो भी आया, कोई गया ना खाली -2

थोड़ी म्हां पर म्हेर करो थे, मैं हूं एक सवाली -2

मैं भी आया थांरे द्वार, म्हारी सुण लो पुकार

बाबा नैया ने पार लगा दीजो......


चरण कमळ में शीश नवाऊं, सिंवरुं बारम्बार -2

नित रो थोंरे धोक लगाउं, झुक झुक करुं जुहार -2

थे हो भगतां रा सिरमौर, कर लो म्हां पर थोडो गौर 

बाबा नैया ने पार लगा दीजो......

मंगलवार, 22 अगस्त 2023

लोग केवे के दिखण में गोरी है         

भायला थारी सगी रंगीली है


मिश्री घोळर गीत गावे ब्यांव में


गीत गावे प्रेम रा गीतारी है              


लूतरा केवे मने जद प्रेम सूं              


यार लागे आ सगी मोजीली है         


भोळी है पण तेज है बोलण में औ'


सुस्त सागे थोडी सी खोडीली है        


आंख में मीठी शरम औ' होठ पर 


मौजीली होळी री फीटी गाळी है       


बात सुण लो थे सगो जी आज तो 


आ सगी केवे सगो जी पेली है           

कुमार अहमदाबादी

रविवार, 30 जुलाई 2023

सगी रंगीली है(राजस्थाजी गज़ल)

लोग केवे के दिखण में गोरी है         

भायला थारी सगी रंगीली है


मिश्री घोळर गीत गावे ब्यांव में


गीत गावे प्रेम रा गीतारी है              


लूतरा केवे मने जद प्रेम सूं              


यार लागे आ सगी मोजीली है         


भोळी है पण तेज है बोलण में औ'


सुस्त सागे थोडी सी खोडीली है        


आंख में मीठी शरम औ' होठ पर 


मौजीली होळी री फीटी गाळी है       


बात सुण लो थे सगो जी आज तो 


आ सगी केवे सगो जी पेली है           

कुमार अहमदाबादी

शनिवार, 18 दिसंबर 2021

भोळे रो भजन


 

भोळे राजा आई मैं लायी थांरे वास्ते

काजू पिस्ता अंगूर रो रस थांरे वास्ते

भोळे राजा......


भोळेराजा करो ना नखरा थे आवोनी 

किती देर रेसो रुठ्योडा पूछे है भोळी

भोळे राजा........


भोळा नाथ लेवों आज सागे ठंडाई

काजू बदाम अंगूर में घोटी है ठंडाई

भोळे राजा........


ले'र ठंडाई प्रेम जगत में घूमने चालों 

कलपना री दुनिया में मस्ती सूं नाचों

भोळे राजा........

*कुमार अहमदाबादी*

आज जासी(गज़ल)

आज जासी काल आसी

काल नूंवो साल आसी


बात समझो घाव लाग्यों

खून सब'रे लाल आसी


सुण जवानी आज थारे

होंठ कन्ने गाल आसी 


तीर जद जद बो चलासी

तीर सामे ढाल आसी


प्रेम सूं हेलो करियों

धोती पेर'र लाल आसी

कुमार अहमदाबादी 



प्रेम सूं (गज़ल)

प्रेम करणो प्रेम सूं 

और करणो नेम सूं 


बाबु थे सोनार हो

मोह राखो हेम सूं 


ब्हेम रो इलाज है?

दूर रैणो ब्हेम सूं 


जॉन जीमण वास्ते 

पोंच जाणो टेम सूं


भायलों सूं रोज मिल

लालजी सूं खेम सूं 

कुमार अहमदाबादी 

गुरुवार, 16 दिसंबर 2021

तोल रो खेल(राजस्थानी गज़ल)

तोल रो है खेल सगळो

बोल रो है खेल सगळो


फूल पत्ती केरी मींडी

गोळ रो है खेल सगळो


देख ले खोटी चमक ने

झोळ रो है खेल सगळो


एक आवे एक जावे

छोळ रो है खेल सगळो

कुमार अहमदाबादी